रिपोर्ट : अनुराग श्रीवास्तव
कानपुर : उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक शहर कानपुर में भारतीय निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान का पहला चरण सफलतापूर्वक समाप्त हो गया है। इस अभियान में 2003 आधारित पुरानी मतदाता सूची की गहन जांच के बाद कुल 9 लाख 1623 मतदाताओं के नाम हटाने का निर्णय लिया गया है। पहले जिले की दस विधानसभा क्षेत्रों में कुल 35 लाख 38 हजार 261 मतदाता दर्ज थे, लेकिन SIR के बाद अब सिर्फ 26 लाख 36 हजार 638 नाम ही वैध बचे हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि यह सफाई मतदाता सूची को सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए जरूरी थी, क्योंकि शहर में तेज पलायन, मृत्यु और डुप्लीकेट एंट्रीज की समस्या वर्षों से बढ़ती जा रही थी।
नाम हटने की मुख्य वजहें जो सामने आईं हैं उनमें मृत मतदाता (1 लाख 4002), लंबे समय से अनुपस्थित या लापता व्यक्ति (3 लाख 9945), स्थायी रूप से दूसरे शहर या राज्य में शिफ्ट हो चुके लोग (3 लाख 91 हजार 166), कहीं और वोटर लिस्ट में पहले से दर्ज डुप्लीकेट नाम (67 हजार 247) और अन्य तकनीकी या प्रशासनिक कारण (29 हजार 263)। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि शहरीकरण और माइग्रेशन ने मतदाता सूची में बड़ी विसंगतियां पैदा कर दी थीं, जिन्हें अब दूर किया जा रहा है।
एडीएम वित्त एवं राजस्व द्वारा बताया गया कि SIR के दौरान ‘नो मैपिंग’ श्रेणी में आए 2 लाख 15 हजार 69 मतदाताओं को विशेष नोटिस जारी किए जाएंगे, क्योंकि उनका पता या मैपिंग सही नहीं मिली। इन लोगों को दस्तावेज जमा करने का मौका मिलेगा। आगे की प्रक्रिया में 31 दिसंबर 2025 को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की जाएगी, जिस पर कोई भी नागरिक आपत्ति या दावा दर्ज करा सकेगा। आपत्तियों के निपटारे के बाद 6 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी।
जिला प्रशासन ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे अपनी स्थिति जरूर जांच लें। अगर ड्राफ्ट लिस्ट में नाम नहीं मिलता या गलती लगती है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। नया नाम जोड़ने, सुधार करने या बहाल करने के लिए फॉर्म-6 भर सकते हैं। यह फॉर्म अपने क्षेत्र के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से ऑफलाइन या निर्वाचन आयोग की वेबसाइट voters.eci.gov.in और Voter Helpline ऐप से ऑनलाइन जमा किया जा सकता है। समय रहते आवेदन करने पर नाम आसानी से जुड़ जाएगा।
यह अभियान पूरे उत्तर प्रदेश में चल रहा है और इसका मकसद लोकतंत्र को मजबूत करना तथा चुनावी प्रक्रिया को फर्जीवाड़े से मुक्त बनाना है। कानपुर जैसे बड़े शहरों में सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है, लेकिन प्रशासन का दावा है कि कोई भी वास्तविक मतदाता इससे वंचित नहीं होगा। सभी से अनुरोध है कि सक्रिय होकर इस प्रक्रिया में भाग लें और अपना वोटिंग अधिकार सुरक्षित रखें। अधिक जानकारी के लिए जिला निर्वाचन कार्यालय या हेल्पलाइन