मॉस्को: रूस के साइबेरिया क्षेत्र में एक लैब कर्मचारी की गंभीर निमोनिया के बाद मौत से स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। मामला इरकुत्स्क क्षेत्र के शेलेखोव शहर का बताया जा रहा है। मृतक 28 वर्षीय महिला एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करती थी। उसकी मौत के बाद उसके संपर्क में आए करीब 197 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है। महिला की लैब में काम करने की प्रकृति और बीमारी से पहले हुई कथित एक घटना के कारण न्यूमोनिक प्लेग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, रूसी अधिकारियों ने अब तक यह पुष्टि नहीं की है कि महिला की मौत प्लेग संक्रमण के कारण हुई थी।
लैब में टेस्ट ट्यूब टूटने की बात आई सामने
रिपोर्टों के मुताबिक, महिला ने अस्पताल में डॉक्टरों को बताया था कि लैब में काम करने के दौरान उससे एक टेस्ट ट्यूब टूट गई थी। दावा है कि उस ट्यूब में जीवित जैविक सामग्री मौजूद थी। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ट्यूब में किस तरह का जैविक पदार्थ या रोगजनक था। यही वजह है कि महिला के काम और उसकी बाद में बिगड़ी तबीयत के बीच संभावित संबंध की जांच की जा रही है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि लैब में हुई इस घटना का उसकी बीमारी से सीधा संबंध था।
गंभीर निमोनिया के बाद वेंटिलेटर पर रखा गया
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, महिला की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसे गंभीर निमोनिया की शिकायत थी और हालत खराब होने पर वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी। इलाज के बावजूद 1 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई। बीमारी के कारणों की जांच के साथ-साथ उसके संपर्क में आए लोगों की भी निगरानी शुरू कर दी गई है।
197 लोग मेडिकल निगरानी में
महिला के संपर्क में आए करीब 197 लोगों की पहचान की गई है। इनमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष संपर्क वाले लोग शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, 100 से ज्यादा लोगों की अस्पतालों में निगरानी की जा रही है। शेलेखोव जिला अस्पताल समेत आसपास के कुछ स्वास्थ्य संस्थानों में भी एहतियाती कदम उठाए गए हैं। अधिकारियों का फोकस संभावित संक्रमण के किसी भी संकेत का समय रहते पता लगाने और जरूरत पड़ने पर संक्रमण को फैलने से रोकने पर है।
Rospotrebnadzor ने क्या कहा?
रूस की उपभोक्ता अधिकार और मानव कल्याण निगरानी सेवा Rospotrebnadzor ने बताया कि एंटी-प्लेग संस्थान के एक कर्मचारी में अज्ञात कारण से गंभीर निमोनिया का मामला सामने आने के बाद जरूरी सैनिटरी और महामारी-रोधी उपाय किए गए हैं। एजेंसी के मुताबिक, इरकुत्स्क क्षेत्र में फिलहाल महामारी संबंधी स्थिति स्थिर है। संभावित करीबी संपर्कों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निगरानी में शामिल लोगों में फिलहाल बीमारी के लक्षण नहीं पाए गए हैं और जिन लोगों की जांच की गई है, उनके टेस्ट नकारात्मक आए हैं।
क्यों उठी न्यूमोनिक प्लेग की आशंका?
इस मामले में न्यूमोनिक प्लेग का जिक्र इसलिए हो रहा है क्योंकि मृतक महिला एक एंटी-प्लेग रिसर्च संस्थान में काम करती थी और कथित तौर पर लैब में जैविक सामग्री से जुड़ी एक घटना भी हुई थी। न्यूमोनिक प्लेग, Yersinia pestis नामक बैक्टीरिया से होने वाली प्लेग बीमारी का एक गंभीर रूप है। यह फेफड़ों को प्रभावित करता है और कुछ परिस्थितियों में संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक सांस से निकलने वाली बूंदों के जरिए फैल सकता है।
हालांकि, मौजूदा मामले में महिला की मौत को न्यूमोनिक प्लेग से जोड़ने वाली कोई आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। स्वास्थ्य अधिकारी संपर्क में आए लोगों की निगरानी और जांच के जरिए स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।