कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की चर्चा तेज हो गई है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और चार बार की सांसद शताब्दी रॉय ने सार्वजनिक तौर पर नेतृत्व शैली पर सवाल उठाते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी में उनकी बातों को नजरअंदाज किया जाता था और फैसलों में नेताओं की राय नहीं ली जाती थी।
शताब्दी रॉय के बयान को टीएमसी के अंदर बढ़ती नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में पार्टी के काम करने के तरीके में काफी बदलाव आया है। उनका कहना था कि जब भी उन्होंने संगठन और जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखने की कोशिश की, उन्हें चुप रहने के लिए कहा गया।
‘पार्टी में हमारी बात नहीं सुनी गई’
एक न्यूज चैनल से बातचीत में शताब्दी रॉय ने कहा कि वह लोगों के लिए काम करना चाहती थीं, लेकिन संगठन के भीतर उनकी आवाज को महत्व नहीं मिला। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व तक पहुंच सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों की रह गई थी।
टीएमसी सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि संगठन में नीचे से लेकर ऊपर तक भ्रष्टाचार का माहौल बन गया था, जिससे उन्हें काफी निराशा हुई। उनके मुताबिक, पार्टी के भीतर पारदर्शिता और संवाद की कमी लगातार बढ़ती गई।
2009 से ममता बनर्जी के साथ थीं शताब्दी
शताब्दी रॉय साल 2009 से तृणमूल कांग्रेस के साथ जुड़ी हुई हैं और पार्टी के प्रमुख चेहरों में मानी जाती रही हैं। वह चार बार लोकसभा सांसद रह चुकी हैं। माना जा रहा है कि हाल के दिनों में पार्टी के भीतर सक्रिय असंतुष्ट गुट में भी उनकी अहम भूमिका है।
बंगाल की राजनीति में बढ़ सकती है हलचल
शताब्दी रॉय के इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आता रहा, तो आने वाले समय में टीएमसी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।