देश के दो प्रमुख धार्मिक स्थलों—अयोध्या के श्रीराम मंदिर और उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम—में दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले चर्चा का विषय बने हुए हैं। दोनों मामलों में श्रद्धालुओं के चढ़ावे को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं, लेकिन जांच की दिशा और आरोपों की प्रकृति अलग-अलग है।
राम मंदिर: करोड़ों के चढ़ावे में संगठित चोरी का आरोप
अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से श्रद्धालुओं का लगातार सैलाब उमड़ता रहा है। मंदिर को अब तक हजारों करोड़ रुपये का नकद और बहुमूल्य दान प्राप्त हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मंदिर में अब तक 3,200 करोड़ रुपये से अधिक का चढ़ावा आया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, दानपात्रों से नकदी की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारियों ने कथित रूप से जेबों और मोजों में पैसे छिपाकर बाहर ले जाने का प्रयास किया। इस मामले में अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एसआईटी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप चुकी है और आरोपियों की संपत्तियों के साथ-साथ पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।
प्रारंभिक जांच में यह मामला एक संगठित साजिश की ओर इशारा करता है। जांच में सीसीटीवी निगरानी की कमी, काउंटिंग रूम में कर्मचारियों की प्रभावी तलाशी न होना और सुरक्षा व्यवस्था में कई खामियां सामने आई हैं। जांच एजेंसियां बैंक कर्मचारियों की संभावित भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।
बद्रीनाथ धाम: चढ़ावे में हेराफेरी का आरोप, एफआईआर दर्ज
उत्तराखंड के चमोली जिले स्थित बद्रीनाथ धाम में सामने आया मामला फिलहाल दान राशि में कथित हेराफेरी से जुड़ा है। आरोप मंदिर समिति के अध्यक्ष के निजी सहायक प्रमोद नौटियाल पर लगे हैं।
शिकायत सामने आने के बाद बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने प्रमोद नौटियाल को निलंबित कर दिया है और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। मामले की सरकारी स्तर पर जांच जारी है। इस बीच मंदिर समिति के कार्यालय से कुछ लैपटॉप गायब होने की जानकारी भी सामने आई है, जिसकी भी जांच की जा रही है।
दोनों मामलों में क्या है बड़ा अंतर?
राम मंदिर और बद्रीनाथ धाम दोनों मामलों में दान राशि को लेकर सवाल उठे हैं, लेकिन दोनों की प्रकृति अलग दिखाई देती है।
- राम मंदिर मामला: अब तक की जांच में कई लोगों की कथित संलिप्तता सामने आई है। पुलिस और एसआईटी इसे संगठित अपराध के तौर पर जांच रही हैं और कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
- बद्रीनाथ धाम मामला: फिलहाल जांच का केंद्र एक व्यक्ति पर लगे आरोप हैं। मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच जारी है, लेकिन अभी तक किसी बड़े नेटवर्क की पुष्टि नहीं हुई है।
दोनों मामलों ने देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर दान प्रबंधन, पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियां दोनों मामलों की अलग-अलग स्तर पर पड़ताल कर रही हैं और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।