महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा अब दिल्ली तक पहुंच चुकी है। इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) द्वारा दिल्ली में बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के केवल तीन सांसद ही शामिल हुए, जबकि छह सांसद गैरहाजिर रहे। इससे पार्टी में संभावित टूट की अटकलों को और बल मिला है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक से दूरी बनाने वाले सांसदों के रुख ने उनके अलग होने की चर्चाओं को और मजबूत कर दिया है। इस बीच सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित खतरे को देखते हुए इन छह सांसदों की सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया है।
इंटेलिजेंस विभाग की ओर से जारी एक अर्जेंट वायरलेस संदेश में गृह मंत्रालय के निर्देशों का हवाला देते हुए महाराष्ट्र पुलिस को संबंधित सांसदों को तत्काल प्रभाव से ‘Y+’ श्रेणी के समकक्ष स्थानीय सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। बताया गया है कि हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और संभावित सुरक्षा जोखिमों के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है।
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के कुछ कार्यकर्ता हालिया बगावत की अटकलों के विरोध में सड़कों पर उतरते भी दिखाई दिए हैं।
जिन सांसदों की सुरक्षा बढ़ाई गई:
- संजय देशमुख (यवतमाल)
- संजय जाधव (परभणी)
- संजय दिना पाटिल (मुंबई उत्तर-पूर्व)
- नागेश पाटिल अष्टीकर (हिंगोली)
- ओमराजे निंबालकर (धाराशिव)
- भाऊसाहेब वाघचौरे (शिर्डी)
इन घटनाक्रमों के बीच महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के भविष्य और संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।