नई दिल्ली: दिल्ली-फुकेट फ्लाइट से जुड़े मामले के बीच एयर इंडिया ग्रुप को लेकर एक और अहम जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, एयर इंडिया ग्रुप के दो पायलटों की अनिवार्य साइकोएक्टिव सब्सटेंस स्क्रीनिंग में शुरुआती नतीजे ‘नॉन-नेगेटिव’ आए हैं। दोनों पायलटों के सैंपल अब कंफर्मेटरी लैब टेस्ट के लिए भेजे गए हैं। फिलहाल अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।
‘नॉन-नेगेटिव’ का मतलब क्या है?
शुरुआती स्क्रीनिंग में ‘नॉन-नेगेटिव’ परिणाम आने का मतलब यह नहीं है कि पायलट ने किसी प्रतिबंधित साइकोएक्टिव पदार्थ का सेवन किया था। प्रारंभिक टेस्ट में किसी पदार्थ या केमिकल मार्कर की मौजूदगी का संकेत मिल सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि विस्तृत लैब जांच के बाद ही होती है। कंफर्मेटरी टेस्ट के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि शुरुआती स्क्रीनिंग का परिणाम वास्तव में पॉजिटिव है या नहीं।
300-400 पायलटों की हो चुकी स्क्रीनिंग
सूत्रों के मुताबिक, एयर इंडिया ग्रुप में अनिवार्य स्क्रीनिंग प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब तक करीब 300 से 400 पायलटों की जांच की जा चुकी है। इसी प्रक्रिया के दौरान दो पायलटों के शुरुआती नतीजे नॉन-नेगेटिव पाए गए। अब दोनों के सैंपल की विस्तृत जांच की जा रही है। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के बाद बढ़ाई गई निगरानी
एयर इंडिया ग्रुप ने 13 अगस्त से अपने पायलटों के लिए साइकोएक्टिव सब्सटेंस स्क्रीनिंग अनिवार्य की थी। यह कदम फुकेट से दिल्ली आने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 से जुड़े मामले के बाद उठाया गया था। इस स्क्रीनिंग का उद्देश्य ऐसे साइकोएक्टिव पदार्थों की पहचान करना है, जो पायलट की उड़ान भरने की क्षमता और सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं।
फाइनल रिपोर्ट के बाद ही होगी स्थिति साफ
एयरलाइन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा मानकों को मजबूत करने के लिए स्क्रीनिंग प्रक्रिया लगातार जारी है। हालांकि, जब तक कंफर्मेटरी लैब रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक दोनों पायलटों के शुरुआती नॉन-नेगेटिव परिणाम को पदार्थ के सेवन की पुष्टि नहीं माना जा सकता।