नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और इजरायल के खिलाफ चल रहे संघर्ष में रूस की भूमिका को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि रूस सीधे तौर पर युद्ध में शामिल नहीं है, लेकिन वह ईरान को अहम खुफिया जानकारी देकर उसकी मदद कर रहा है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि यह मानना गलत होगा कि इस संघर्ष में रूस और चीन की कोई भूमिका नहीं है। उनके मुताबिक रूस अप्रत्यक्ष रूप से ईरान को अमेरिकी सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारी दे रहा है। इसमें समुद्र में मौजूद अमेरिकी युद्धपोतों और आसमान में उड़ रहे लड़ाकू विमानों की लोकेशन जैसी जानकारी शामिल बताई जा रही है। इसी आधार पर ईरान अपने हमलों के लिए टारगेट तय कर रहा है।
कुवैत में ड्रोन हमले में 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत
अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार हाल ही में कुवैत में एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ड्रोन हमला हुआ। इस हमले में 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि 18 अन्य घायल हो गए। बताया गया कि ड्रोन ने पोर्ट शुएबा स्थित एक कमांड सेंटर को निशाना बनाया। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इतनी सटीक स्ट्राइक बिना मजबूत खुफिया जानकारी के संभव नहीं होती।
व्हाइट हाउस का दावा- ईरान की सैन्य ताकत कमजोर पड़ रही
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली का कहना है कि लगातार दबाव के कारण ईरान की सैन्य क्षमता पर असर पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल भंडार में कमी आ रही है और उसकी नौसैनिक ताकत भी कमजोर हुई है।
रूस और चीन ने अमेरिका-इजरायल के हमलों की आलोचना की
दूसरी तरफ रूस और चीन ने ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की निंदा की है। दोनों देशों का कहना है कि उन्हें ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है।
ट्रंप ने दी बिना शर्त सरेंडर की चेतावनी
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बिना शर्त आत्मसमर्पण करने की सलाह दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि अगर ईरान सरेंडर करता है तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश मिलकर उसे आर्थिक रूप से पहले से ज्यादा मजबूत बनाने में मदद करेंगे। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में हमले और सैन्य गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।