नई दिल्ली| लोकसभा में मंगलवार को पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने नीट पेपर लीक और छात्र आंदोलन का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने सरकार पर छात्रों के आंदोलन को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान जिस तरह की कार्रवाई हुई, उससे ऐसा लगा मानो छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया हो।
‘गोली नहीं चली, बाकी सब कुछ हुआ’
सदन में बोलते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग के कई तरीके अपनाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया, आंसू गैस के गोले छोड़े गए, पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ और बिहार में गोली चलने की घटनाएं भी सामने आईं। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे थे जैसे सरकार अपने ही छात्रों से नहीं, बल्कि किसी बड़े खतरे से निपट रही हो।
भगत सिंह की भूख हड़ताल का किया जिक्र
अपने संबोधन में चंद्रशेखर आजाद ने स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह की भूख हड़ताल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर की घटनाएं उन्हें छात्र आंदोलन की याद दिलाती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगों को सुनने के बजाय उनके खिलाफ बल प्रयोग किया गया, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
‘छात्रों का भरोसा बहाल करना जरूरी’
नगीना सांसद ने कहा कि जिन छात्रों ने परीक्षा विवाद और पेपर लीक की घटनाओं से निराश होकर आत्महत्या जैसा कदम उठाया, उनके परिवारों के प्रति सरकार को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज देश का युवा यह सवाल पूछ रहा है कि उसकी सफलता उसकी मेहनत तय करेगी या फिर पेपर लीक करने वाले गिरोह।
उन्होंने कहा कि छात्रों के बीच यह डर लगातार बढ़ रहा है कि परीक्षा देने के बाद कहीं पेपर लीक या परीक्षा रद्द होने की खबर फिर सामने न आ जाए।
परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
चंद्रशेखर आजाद ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब परीक्षार्थियों की पहचान आधार, बायोमेट्रिक और कई स्तर की जांच से सुनिश्चित की जा सकती है, तो प्रश्नपत्रों की सुरक्षा क्यों नहीं हो पा रही है।
उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आए कथित पेपर लीक मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं ने लाखों युवाओं का भरोसा कमजोर किया है। उनके मुताबिक, अब केवल सख्त कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
सदन में परीक्षा सुधार पर तेज हुई बहस
लोकसभा में संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने भी परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक पर कड़ी कार्रवाई और छात्रों के हितों की सुरक्षा को लेकर सरकार से जवाब मांगा। वहीं सरकार ने विधेयक को परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।