लद्दाख में भारतीय वायुसेना के चीता हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर सामने आई है। हादसे में डिवीजन कमांडर मेजर जनरल सचिन मेहता सहित दो पायलट अधिकारी घायल हुए हैं। राहत की बात यह रही कि हेलीकॉप्टर में सवार सभी लोग सुरक्षित बचा लिए गए और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। घायल अधिकारियों का इलाज अस्पताल में चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, यह हादसा लेह के दक्षिण-पूर्व में स्थित तांगत्से इलाके के पास हुआ। उस समय मेजर जनरल सचिन मेहता हेलीकॉप्टर में यात्री के रूप में सवार थे, जबकि लेफ्टिनेंट कर्नल और मेजर रैंक के दो अधिकारी हेलीकॉप्टर उड़ा रहे थे। दुर्घटना के बाद तीनों को मामूली चोटें आईं।
सेना ने घटना को गंभीरता से लेते हुए हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। मामले की पड़ताल के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (CoI) गठित की गई है। शुरुआती रिपोर्ट्स में तकनीकी कारणों की आशंका जताई जा रही है, हालांकि असली वजह जांच के बाद ही साफ हो सकेगी।
हादसे के बाद घटनास्थल की कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें क्षतिग्रस्त हेलीकॉप्टर के पास तीनों अधिकारी दिखाई दे रहे हैं। सेना की रेस्क्यू टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया।
यह हादसा एक बार फिर भारतीय सेना की पुरानी चीता और चेतक हेलीकॉप्टर फ्लीट को लेकर उठ रहे सवालों को चर्चा में ले आया है। सेना पहले ही इन पुराने हेलीकॉप्टरों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना पर काम कर रही है। आने वाले वर्षों में इनकी जगह HAL के आधुनिक लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (LUH) लेने वाले हैं।
चीता हेलीकॉप्टर पिछले कई दशकों से हिमालयी और ऊंचाई वाले इलाकों में सेना के लिए अहम भूमिका निभाता रहा है। सियाचिन जैसे कठिन क्षेत्रों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि विशेषज्ञ लंबे समय से इसकी पुरानी तकनीक और सुरक्षा को लेकर चिंता जताते रहे हैं।