पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. पार्टी छोड़ने वाले तीन विधायक सोमवार, 2 नवंबर को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. बीजेपी मुख्यालय पहुंचकर तीनों नेताओं ने पार्टी की सदस्यता ली और भाजपा के समर्थन में नारे लगाए. इस घटनाक्रम को मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार के लिए अहम राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है. बीजेपी में शामिल होने वाले नेताओं में पूर्व आईपीएस अधिकारी और अमृतसर नॉर्थ के विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह, समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा और सनौर के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा शामिल हैं.
टिकट कटने के बाद AAP से बनाई दूरी
इन तीनों विधायकों का नाम आम आदमी पार्टी की ओर से जारी 2027 विधानसभा चुनाव के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची में शामिल नहीं था. इसके बाद पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चाएं तेज हो गई थीं. चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा ने 1 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था. वहीं, कुंवर विजय प्रताप सिंह ने सोमवार को विधायक पद छोड़ने का ऐलान किया. उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान को भेजा और इसके बाद बीजेपी मुख्यालय पहुंचकर पार्टी में शामिल हो गए.
सरकार के खिलाफ लगातार उठाते रहे सवाल
कुंवर विजय प्रताप सिंह पंजाब के चर्चित पुलिस अधिकारियों में रहे हैं. उन्होंने 2015 के बरगाड़ी बेअदबी मामले और उससे जुड़े पुलिस फायरिंग प्रकरणों में न्याय मिलने में देरी को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की थी. जनवरी 2023 में जांच से जुड़े मतभेदों के बाद उन्होंने विधानसभा की सरकारी आश्वासन समिति के अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया था. इसके अलावा उन्होंने पंजाब में नशे, अपराध, जबरन वसूली और गैंगस्टर गतिविधियों को लेकर भी सरकार को घेरा था. जून 2025 में अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की गिरफ्तारी और विजिलेंस ब्यूरो की कार्रवाई पर भी उन्होंने सवाल उठाए थे.
AAP ने पांच साल के लिए किया था निलंबित
कुंवर विजय प्रताप सिंह के सार्वजनिक बयानों को पार्टी विरोधी गतिविधि मानते हुए आम आदमी पार्टी ने वर्ष 2025 में उन्हें पांच साल के लिए निलंबित कर दिया था. इसके बावजूद उन्होंने पार्टी और सरकार के कामकाज को लेकर अपनी आलोचना जारी रखी. पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में तीन विधायकों का पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होना राज्य की राजनीति में अहम घटनाक्रम है. खास बात यह है कि तीनों नेताओं के पार्टी छोड़ने का समय AAP की पहली उम्मीदवार सूची जारी होने के ठीक बाद आया है. अब इस घटनाक्रम का आगामी चुनावों में क्या असर पड़ता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी.