भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने भोपाल की रहने वाली ट्विशा शर्मा की दहेज मृत्यु के मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का फैसला किया है। मृतका के परिवार ने मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए साक्ष्य छिपाने और जांच प्रभावित किए जाने के आरोप लगाए थे। परिजनों का कहना है कि ट्विशा के ससुराल पक्ष में एक पूर्व जिला जज होने की वजह से मामले की निष्पक्ष जांच पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में बताया गया कि थाना कटारा हिल्स में अपराध क्रमांक 133/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया था। केस भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत दर्ज है। राज्य सरकार ने अब इस पूरे मामले की जांच CBI को सौंपने की सिफारिश की है।
अधिसूचना के मुताबिक दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 की धारा 6 के तहत मध्य प्रदेश सरकार ने CBI को राज्य में जांच का अधिकार देने की सहमति दी है। यह अनुमति मामले से जुड़े कथित षड्यंत्र, दुष्प्रेरण और अन्य अपराधों की जांच पर भी लागू होगी।
इधर, ट्विशा शर्मा के परिजन दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। परिवार की ओर से दाखिल याचिका में पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। परिजनों का आरोप है कि रिपोर्ट में कई खामियां हैं, इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए दोबारा पोस्टमार्टम जरूरी है।
परिवार के वकील अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि भोपाल एम्स में किए गए पहले पोस्टमार्टम को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। इससे पहले भोपाल की एक अदालत परिवार की दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर चुकी है।
इस मामले में पुलिस ने ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी मां, पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। फिलहाल मामले को लेकर जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है।