नई दिल्ली। ईरान के अनुरोध पर भारत ने उसके एक युद्धपोत को केरल के कोच्चि बंदरगाह पर लंगर डालने की अनुमति दी है। सरकारी अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि जहाज़ के 183 सदस्यीय चालक दल को कोच्चि स्थित नौसैनिक सुविधाओं में ठहराया गया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब दो दिन पहले श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी फ्रिगेट के डूबने की घटना सामने आई थी। बताया जा रहा है कि अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा टॉरपीडो हमले में ईरान का फ्रिगेट आईआरआईएस डेना डूब गया था, जिसमें 87 नाविकों की मौत हो गई।
इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में शामिल हुआ था युद्धपोत
जानकारी के मुताबिक, ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस लावन पिछले महीने भारत में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने के लिए इस क्षेत्र में आया था। जहाज़ बुधवार को कोच्चि पहुंचा। ईरानी पक्ष ने भारत से संपर्क कर बताया था कि जहाज़ में तकनीकी समस्या आ गई है, इसलिए उसे बंदरगाह पर रुकने की अनुमति दी जाए।
अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने 28 फरवरी को भारत से संपर्क किया था, जिसके बाद 1 मार्च को कोच्चि बंदरगाह में प्रवेश की अनुमति दे दी गई। इसके बाद युद्धपोत 4 मार्च को कोच्चि पहुंच गया।
श्रीलंका ने भी एक ईरानी युद्धपोत को दी अनुमति
इधर श्रीलंका ने भी एक अन्य ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस बूशहर को अपने यहां शरण लेने की अनुमति दी है। श्रीलंकाई अधिकारियों ने जहाज़ को बंदरगाह में प्रवेश दिया और उसके 208 सदस्यीय चालक दल को नौसैनिक शिविर में ठहराया गया है। बताया जा रहा है कि इस युद्धपोत में भी तकनीकी खराबी आ गई थी।
हिंद महासागर में बढ़ी चिंता
आईआरआईएस डेना के डूबने के बाद हिंद महासागर क्षेत्र में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इस पूरे मामले में भारत के कदम को संतुलित और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप बताया जा रहा है।