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अन्तर्राष्ट्रीय

रोहिंग्या विद्रोही म्यांमार से वार्ता को तैयार

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नाय प्यी तॉ, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)| म्यांमार के प्राधिकारियों द्वारा आंतकी संगठन के रूप में वर्गीकृत अराकन रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (एआरएसए) ने शनिवार को कहा कि वह सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार है। एआरएसए विद्रोही अगस्त माह में राखिने क्षेत्र में सरकारी चौकियों पर बहुसंख्यक हमले के पीछे थे, जो क्षेत्र में सेना की हिसक कार्रवाई और नतीजन हजारों रोहिंग्याओं के विस्थापन का कारण बने।

सोशल मीडिया पर समूह द्वारा जारी एक बयान में कहा गया, अगर किसी भी चरण पर म्यांमार सरकार शांति के लिए झुकती है तो एआरएसए इस झुकाव का स्वागत करेगा और उस पर विनिमय करेगा।

एफे समाचार की खबर के मुताबिक, एआरएसए ने यह भी कहा कि सितंबर महीने में युद्धविराम के बाद क्षेत्र में मानवतावादी सहायता पहुंचने के सिलसिले का अंत सोमवार को हो जाएगा और उन्होंने म्यांमार के अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि यह राखिने में सहायता को रोकने के लिए किया जा रहा है।

बयान में कहा गया है, मानवीय पहुंच को बाधित करने का मुख्य कारण म्यांमार सरकार का निरंतर सैन्य संचालन और एक राजनीतिक रणनीति है, जो जनहत्या, हिंसा, आगजनी, धमकी और जनसंहार, दुष्कर्म जैसे अस्त्रों का उपयोग कर रही है। इससे आबादी घट गई है।

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, 25 अगस्त के बाद से करीब 515,000 रोहिंग्या लोग भागकर बांग्लादेश जा चुके हैं। एआरएसए ने राखिने में 9 अक्टूबर, 2016 को सरकारी चौकियों पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली है। इसी हमले ने राखिने में सेना को पहली हिंसक कार्रवाई के लिए प्रेरित किया था।

राखिने में रहने वाले एक लाख से अधिक रोहिंग्या वर्ष 2012 में सांप्रदायिक हिंसा के बाद से उत्पीड़न का शिकार हुए, जिसमें कम से कम 160 लोग मारे गए और 120,000 लोग 67 शरणार्थी शिविरों तक सीमित हैं।

म्यांमार ने रोहिंग्या, जो देश में कई पीढ़ियों से रह रहे थे, उन्हें बांग्लादेश से भागकर आए अवैध आप्रवासी माना और उनसे नागरिक अधिकार छीन लिए।

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अन्तर्राष्ट्रीय

पीएम मोदी को मिलेगा ‘विश्व शांति पुरस्कार’

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विश्व शांति पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। यह पुरस्कार उन्हें अमेरिका में प्रदान किया जाएगा। इंडियन अमेरिकन माइनॉरटीज एसोसिएशन (एआइएएम) ने मैरीलैंड के स्लिगो सेवंथ डे एडवेंटिस्ट चर्च ने यह ऐलान किया है। यह एक गैर सरकारी संगठन है। यह कदम उठाने का मकसद अमेरिका में भारतीय अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के कल्याण को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें एकजुट करना है। पीएम मोदी को यह पुरस्कार विश्व शांति के लिए उनके द्वारा किए जा रहे प्रयासों और समाज को एकजुट करने के लिए दिया जाएगा।

इसी कार्यक्रम के दौरान अल्पसंख्यकों का उत्थान करने के लिए वाशिंगटन में पीएम मोदी को मार्टिन लूथर किंग जूनियर ग्लोबल पीस अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। इस पुरस्कार को वाशिंगटन एडवेंटिस्ट यूनिवर्सिटी और एआइएएम द्वारा संयुक्त रूप से दिया जाएगा। जिसका मकसद अस्पसंख्यकों के कल्याण के साथ उनका समावेशी विकास करना भी है।

जाने माने परोपकारी जसदीप सिंह एआइएम के संस्थापक और चेयरमैन नियुक्त किए गए हैं। इसमें अल्पसंख्यक समुदाय को प्रोत्साहित करने के लिए 7 सदस्यीय बोर्ड डायरेक्टर भी हैं। इसमें बलजिंदर सिंह, डॉ. सुखपाल धनोआ (सिख), पवन बेजवाडा और एलिशा पुलिवार्ती (ईसाई), दीपक ठक्कर (हिंदू), जुनेद काजी (मुस्लिम) और भारतीय जुलाहे निस्सिम रिव्बेन शाल है।

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