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खेल-कूद

श्रीलंका साबित हो सकता है ‘छुपा रुस्तम’

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क्राइस्टचर्च| श्रीलंका 14 फरवरी से शुरू हो रहे आईसीसी विश्व कप 2015 में अगर प्रबल दावेदार नहीं है तो अन्य टीमें उसे हल्के में भी नहीं ले रहीं। श्रीलंकाई कप्तान एंजेलो मैथ्यूज ने भी कुछ दिनों पहले यह बयान दिया कि वह इससे खुश हैं कि उनकी टीम को प्रबल दावेदार नहीं माना जा रहा। मैथ्यूज के अनुसार, इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि टीम पर किसी प्रकार का कोई दबाव नहीं है।

विश्व कप के लिए चुनी गई श्रीलंकाई टीम की सबसे बड़ी खासियत और शायद सबसे कमजोर पक्ष यह है कि टीम में कई अनुभवी खिलाड़ी और पूर्व कप्तान शामिल हैं। यह परिस्थिति टीम के लिए एक दोधारी तलवार जैसी है।

मैथ्यूज ने हालांकि , ऐसी किसी भी चिंता को दरकिनार करते हुए कहा कि कुमार संगकारा और माहेला जयवर्धने जैसे खिलाड़ी पूरी टीम के लिए प्रेरणा हैं।

यह भी गौर करने वाली बात है कि श्रीलंका पिछले दोनों संस्करणों के फाइनल में पहुंचा था। साथ ही श्रीलंका पिछले छह विश्व कप के पांच संस्करणों में सेमीफाइनल में पहुंचने में कामयाब रहा है।

ऐसे में साफ है कि 1996 की विश्व चैम्पियन टीम श्रीलंका को इस बार भी टूर्नामेंट में कम कर के नहीं आंका जा सकता।

यह जरूर है कि टीम इस बार अपनी शानदार लय में नजर नहीं आ रही। पिछले ही महीने न्यूजीलैंड के खिलाफ सात मैचों की श्रृंखला में 2-4 से मिली हार ने प्रशंसकों की चिंता और बढ़ाई है।

गेंदबाजी में सबसे बड़ा दारोमदार लसिथ मलिंगा पर होगा जो लंबे समय बाद वापसी कर रहे है। मलिंगा टखने में लगी चोट के कारण टीम से बाहर चल रहे थे।

मैथ्यूज ने भी माना है कि मलिंगा के प्रदर्शन पर काफी कुछ निर्भर करेगा लेकिन साथ ही उन्होंने इस बात से इंकार भी किया टीम की गेंदबाजी पूरी तरह से मंलिगा पर ही टिकी है।

थिसारा परेरा, नुवान कुलासेकरा और मैथ्यूज के कंधों पर भी टीम की गेंदबाजी की कमान होगी।

बल्लेबाजी की बात करें तो संगकारा, जयवर्धने और तिलकरत्ने दिलशान पिछले कुछ सालों में एकदिवसीय क्रिकेट में शानदार फॉर्म में नजर आए हैं। मैथ्यूज भी मध्यक्रम पर बल्लेबाजी करने की क्षमता रखते हैं।

श्रीलंका ने आखिरी बार 1996 में विश्व कप जीता था। यह जयवर्धने और संगकारा जैसे सीनियर खिलाड़ियों का आखिरी विश्व कप है। ऐसे में टीम के युवा चेहरे निश्चित ही उन्हें शानदार विदाई देने के मकसद से विश्व कप हासिल करने की कोशिश करेंगे और यही सोच शायद इस बार टीम के लिए एक प्रेरणा का भी काम करेगा।

खेल-कूद

IND VS AUS: पर्थ में टूटा ऑस्ट्रेलिया का घमंड, भारत ने 295 रनों से दी मात

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पर्थ। भारतीय क्रिकेट टीम ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के पहले टेस्ट मैच में मेजबान ऑस्ट्रेलिया को धूल चटाते हुए नया कीर्तिमान रच दिया है। टीम इंडिया ने पर्थ में 16 साल बाद पहला टेस्ट मैच जीता है। इससे पहले भारत ने साल 2008 में कुंबले की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया को हराया था। हालांकि यह मैच पर्थ के ऑप्टस स्टेडियम में खेला गया। पहली पारी में 150 रन बनाने वाली टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को पहली पारी में सिर्फ 104 रनों पर ढेर कर दिया था। इसके बाद टीम इंडिया ने अपनी दूसरी पारी 487/6 रन के स्कोर पर घोषित करते हुए ऑस्ट्रेलिया के सामने 534 रनों का विशाल लक्ष्य रखा।

इस पहाड़ जैसे लक्ष्य का पीछा करते हुए ऑस्ट्रेलिया की टीम दूसरी पारी में सिर्फ 238 रनों के स्कोर पर ढेर हो गई। इस तरह टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में 295 रनों से हराकर बड़ा इतिहास रच दिया। ध्यान देने वाली बात यह है कि टीम इंडिया में न तो रोहित शर्मा थे, न ही शुभमन गिल, न ही रवींद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन और न ही मोहम्मद शमी थे। इसके बावजूद टीम इंडिया ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

पर्थ टेस्ट की दूसरी पारी में यशस्वी जायसवाल ने 161 रन और विराट कोहली ने नाबाद शतकीय पारी खेली। दूसरी पारी में केेल राहुल ने भी 77 रनों की अहम पारी खेली। पहली पारी में टीम इंडिया 150 रनों पर सिमट गई थी पर भारतीय गेंदबाजों ने कमाल का कमबैक करते हुए पूरी ऑस्ट्रेलिया टीम को घुटनों पर ला दिया। ऑस्ट्रेलिया पहली पारी में 104 रन ही बना पाई। दूसरी पारी में टीम इंडिया ने कमाल का कमबैक करते हुए ऑस्ट्रेलिया के सामने 6 विकेट के नुकसान पर 487 रन बनाकर पारी घोषित कर दी। जिससे ऑस्ट्रेलिया को 534 रनो का टारगेट मिला। लेकिन चौथे दिन भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 295 रनों से हरा दिया।

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