अयोध्या। अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पूरी हो चुकी है। गर्भगृह में मंत्रोच्चार के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूजा-अर्चना की। इस दौरान पीएम मोदी के साथ गर्भगृह में कई अन्य गणमान्य भी मौजूद रहे।
प्राण प्रतिष्ठा के बाद आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा कि आज के आनंद का वर्णन शब्दों में नहीं हो सकता है। उन्होंने पीएम मोदी को तपस्वी की उपाधि दी। उन्होंने कहा कि रामलला के साथ भारत का स्व लौटकर आया है।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, ‘आज अयोध्या में रामलला के साथ भारत का स्व लौटकर आया है।’ मोहन भागवत ने कहा कि मन में जो भावनाएं हैं उन्हें व्यक्त करना बहुत मुश्किल है। उन्होंने रामलला के प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के लिए पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए कठोर तप का जिक्र किया।
मोहन भागवत ने कहा कि उनके प्रयासों को कोटि बार नमन है। इस युग में आज के दिन रामलला के फिर वापस आने का इतिहास जो-जो स्मरण करेगा, वह राष्ट्र के लिए होगा। राष्ट्र का सब दुख हरण होगा, ऐसा इस इतिहास का सामर्थ्य है। हमारे लिए कर्तव्य का आदेश भी है। प्रधानमंत्री जी ने तप किया, अब हमें भी तप करना है। राम राज कैसा था, यह याद रखना है। हम भी भारत वर्ष की संतानें हैं। कोटि-कोटि कंठ हमारे हैं जो जयगान करते हैं।
हमें अच्छा व्यवहार रखने का तप-आचरण करना होगा। हमें भी सारे कलह को विदाई देनी होगी। छोटे-छोटे परस्पर मत रहते हैं, छोटे-छोटे विवाद रहते हैं। उसे लेकर लड़ाई करने की आदत छोड़नी पड़ेगी। सत्य कहता है कि सभी घटकों राम हैं।
हमें समन्वय से चलना होगा। हम सबके लिए चलते हैं, सब हमारे हैं, इसलिए हम चल पाते हैं। आपस में समन्वय रखकर व्यवहार रखना ही सत्य का आचरण। करुणा दूसरा कदम है, जिसका मतलब है सेवा और परोपकार।
उन्होंने कहा कि आज अयोध्या में रामलला के साथ भारत का स्व लौटकर आया है। संपूर्ण विश्व को त्रासदी से राहत देने वाला भारत खड़ा होगा। जोश की बातों में होश की बात करने का काम मुझे ही दिया जाता है। आज हमने सुना कि प्रधानमंत्री जी ने यहां आने से पहले कठोर तप रखा। जितना कठोर तप रखा जाना चाहिए था, उससे ज्यादा कठिन तप रखा।
मेरा उनसे पुराना परिचय है। मैं जानता हूं, वे तपस्वी हैं ही। परंतु, वे अकेले तप कर रहे हैं, हम क्या करेंगे? अयोध्या में रामलला आए। अयोध्या से बाहर क्यों गए थे? रामायणकाल में ऐसा क्यों हुआ था। अयोध्या में कलह हुआ था।
अयोध्या में उस पुरी का नाम है, जिसमें कोई द्वंद्व, कलह और दुविधा नहीं। फिर भी 14 वर्ष वनवास में गए। दुनिया के कलह को मिटाकर वापस आए। आज रामलला वापस फिर से आए हैं, पांच सौ वर्ष के बाद। जिनके त्याग, तपस्या, प्रयासों से आज हम यह स्वर्ण दिवस देख रहे हैं, उनका स्मरण प्राण-प्रतिष्ठा के संकल्प में हमने किया।