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बिजनेस

जुलाई की जीएसटीआर-2, जीएसटीआर-3 जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ी

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नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)| जीएसटी करदाताओं को राहत देने के लिए सरकार ने जीएसटीआर-2 और जीएसटीआर-3 रिटर्न जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर क्रमश: 30 नवम्बर और 11 दिसम्बर कर दी है।

जीएसटीआर-2 फार्म में व्यापारियों को कुल खरीद की जानकारी देनी होती है तथा जीएसटीआर-3 में खरीद और बिक्री दोनों की जानकारी देनी होती है।

पहले जीएसटीआर-2 दाखिल करने की अंतिम तिथि मंगलवार थी, जबकि जीएसटीआर-3 दाखिल करने की अंतिम तिथि 10 नवम्बर थी।

सरकार ने एक ट्वीट में कहा है, व्यवसायियों और अन्य करदाताओं की सुविधा के लिए जुलाई महीने की जीएसटीआर-2 और जीएसटीआर-3 जमा करने की तिथि बढ़ाकर क्रमश: 30 नवम्बर और 11 दिसम्बर कर दी गई है।

वित्त मंत्रालय के ट्वीट में कहा गया है, इस संबंध में अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी। इससे 30.81 लाख करदाताओं को सुविधा मिलेगी।

जीएसटी विशेषज्ञ प्रीतम महुरे ने आईएएनएस को बताया, यह जरूरी था, क्योंकि जीएसटीआर-2 जमा करने के दौरान कई तकनीकी गड़बड़ियां सामने आ रही थीं। आनेवाले दिनों में सरकार को जीएसटी अनुपालन संबंधी मुद्दों से निपटने के लिए अच्छी तरह सोच-समझकर रणनीति तैयार करनी चाहिए।

डेलोइट इंडिया के भागीदार एम. एस. मणि ने बताया, जीएसटीआर-2 और जीएसटीआर-3 दोनों के रिटर्न जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाने से करदाताओं के अनुपालन व्यवहार में महत्वपूर्ण सुधार होगा, क्योंकि अब उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट का मिलान करने का अधिक समय मिलेगा, अगर इसमें कोई गड़बड़ी होगी तो वे जुलाई का अंतिम रिटर्न दाखिल करने से पहले उसका मिलान कर सुधार कर सकेंगे।

मणि ने कहा कि कुछ करदाताओं द्वारा जीएसटीआर-2 के आंकड़ों में गड़बड़ी से निपटने की समस्या सामने आ रही है। उम्मीद है कि वे नवंबर तक इस समस्या को हल कर लेंगे।

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बिजनेस

जेट एयरवेज की संपत्तियों की होगी बिक्री

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के आदेश को रद्द करते हुए दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) के अनुसार निष्क्रिय जेट एयरवेज के परिसमापन का आदेश दिया। एनसीएलएटी ने पहले कॉरपोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) के हिस्से के रूप में जालान कालरॉक कंसोर्टियम (जेकेसी) को एयरलाइन के स्वामित्व के हस्तांतरण को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी करते हुए कहा कि जेकेसी संकल्प का पालन करने में विफल रहा क्योंकि वह 150 करोड़ रुपये देने में विफल रहा, जो श्रमिकों के बकाया और अन्य आवश्यक लागतों के बीच हवाई अड्डे के बकाया को चुकाने के लिए 350 करोड़ रुपये की पहली राशि थी। नवीनतम निर्णय एयरलाइन के खुद को पुनर्जीवित करने के संघर्ष के अंत का प्रतीक है।

NCLT को लगाई फटकार

पीठ की ओर से फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति पारदीवाला ने एनसीएलएटी के फैसले के खिलाफ एसबीआई तथा अन्य ऋणदाताओं की याचिका को स्वीकार कर लिया। याचिका में जेकेसी के पक्ष में जेट एयरवेज की समाधान योजना को बरकरार रखने के फैसले का विरोध किया गया है। न्यायालय ने कहा कि विमानन कंपनी का परिसमापन लेनदारों, श्रमिकों और अन्य हितधारकों के हित में है। परिसमापन की प्रक्रिया में कंपनी की संपत्तियों को बेचकर प्राप्त धन से ऋणों का भुगतान किया जाता है। पीठ ने एनसीएलएटी को, उसके फैसले के लिए फटकार भी लगाई।

शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया, जो उसे अपने समक्ष लंबित किसी भी मामले या मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आदेश तथा डिक्री जारी करने का अधिकार देता है। एनसीएलएटी ने बंद हो चुकी विमानन कंपनी की समाधान योजना को 12 मार्च को बरकरार रखा था और इसके स्वामित्व को जेकेसी को हस्तांतरित करने की मंजूरी दी थी। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) और जेसी फ्लावर्स एसेट रिकंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने एनसीएलएटी के फैसले के खिलाफ अदालत का रुख किया था।

 

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