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लाइफ स्टाइल

भारत में गैप इंक के 40 स्टोर खुलेंगे

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नई दिल्ली | अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित 16.4 अरब डॉलर की परिधान, एक्सेसरीज और व्यक्तिगत उत्पाद कंपनी गैप इंक अगले एक साल में बेंगलुरू, मुंबई और नई दिल्ली में 10 नए स्टोर खोलने जा रही है। कंपनी ने पिछले साल ही भारत में अपना पहला स्टोर खोला है। कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी।

अरविंद लाइफस्टाइल ब्रांड्स के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी निदेशक जे.सुरेश ने बताया, “हम अगले चार सालों में 40 नए स्टोर खोलेंगे, जिनमें से 10 स्टोर अगले साल के मध्य तक खोले जाएंगे।” सुरेश ने कहा, “प्रत्येक स्टोर खोलने के लिए आठ से दस करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इसमें पूंजीगत व्यय और लागत दोनों शामिल हैं। कंपनी आंतरिक स्रोतों के माध्यम से पूंजी जुटाएगी।” गैप, परिधान और एक्सेसरीज की एक अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी है, जिसकी स्थापना सैन फ्रांसिस्को में 1969 में हुई थी। यह गैप, बनाना रिपब्लिक, ओल्ड नेवीस एथलेटा और इंटरमिक्स ब्रांड के नाम से कारोबार करती है।

भारत में ब्रांड का पहला स्टोर 30 मई को नई दिल्ली में खुला। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि अगले एक साल में ही कंपनी को अपने 10 स्टोरों से भारत में 350-400 नौकरियां सृजित होने की उम्मीद है। सुरेश ने कहा कि गैप ब्रांड के तहत कंपनी के सामानों की विस्तृत श्रंखला है, जिसमें हम न्यूयॉर्क और लंदन जैसे हमारे अंतर्राष्ट्रीय स्थानों के समान ही उत्पाद मुहैया कराएंगे। अरविंद लाइफस्टाइल ने अबतक भारत में टॉमी हिल्फिगर और केल्विन क्लेन सहित 15 अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडों के साथ समझौता किया है।

गैप फ्रेंचाइजी के उपाध्यक्ष इस्माइल सेइस ने कहा, “हम अब भारत में गैप के सामान्य और अमेरिकी शैली के परिधान लाने में सक्षम हैं और हमें अब तक सकारात्मक प्रतिक्रियाओं से प्रोत्साहन मिला है।” उन्होंने कहा, “हमारी ब्रांड जागरूकता काफी बड़ी है और भारत में गैप के लिए काफी संभावनाएं हैं। हम देशभर में एक अद्भुत ब्रांड शॉपिंग अनुभव प्रदान कराने की दिशा में आश्वस्त हैं।”

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साइलेंट किलर है हाई कोलेस्ट्रॉल की बीमारी, इन लक्षणों से होती है पहचान  

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high cholesterol symptoms

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नई दिल्ली। हाई कोलेस्ट्रॉल की बीमारी एक ऐसी समस्या है, जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है इसीलिए इसे एक साइलेंट किलर कहा जाता है। ये बीमारी शरीर पर कुछ संकेत देती है, जिसे अगर नजरअंदाज किया गया, तो स्थिति हाथ से निकल भी सकती है।

हालांकि, पिछले कुछ सालों में कोलेस्ट्रॉल को लेकर लोगों के बीच जागरुकता बढ़ी है और सावधानियां भी बरती जाने लगी हैं। ऐसा नहीं है कि कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए पूरी तरह से नुकसानदायक है। अगर यह सही मात्रा में हो, तो शरीर को फंक्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। चलिए जानते हैं इसी से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें।

कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाए तो क्या होगा?

जब शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 200 mg/dL से अधिक हो जाती है, तो इसे हाई कोलेस्ट्रॉल की श्रेणी में गिना जाता है और डॉक्टर इसे कंट्रोल करने के लिए डाइट से लेकर जीवन शैली तक में कई बदलाव करने की सलाह देते हैं। अगर लंबे समय तक खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बनी रहे, तो यह हार्ट डिजीज और हार्ट स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकता है।

हाई कोलेस्ट्रॉल को “साइलेंट किलर” क्यों कहते हैं?

हाई कोलेस्ट्रॉल को साइलेंट किलर इसलिए कहते हैं क्योंकि व्यक्ति के स्वास्थ्य पर इसका काफी खतरनाक असर पड़ता है, जिसकी पहचान काफी देर से होती है। इसके शुरुआती लक्षण बहुत छोटे और हल्के होते हैं, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर जाते हैं और यहीं से यह बढ़ना शुरू हो जाते हैं। आखिर में इसकी पहचान तब होती है जब शरीर में इसके उलटे परिणाम नजर आने लगते हैं या फिर कोई डैमेज होने लगता है।

शरीर पर दिखने वाले कोलेस्ट्रॉल के लक्षणों को कैसे पहचानें?

हाई कोलेस्ट्रॉल के दौरान पैरों में कुछ महत्वपूर्ण लक्षण नजर आने लगते हैं, जिसे क्लाउडिकेशन कहते हैं। इस दौरान पैरों की मांसपेशियों में दर्द, ऐंठन और थकान महसूस होता है। ऐसा अक्सर कुछ दूर चलने के बाद होता है और आराम करने के साथ ही ठीक हो जाता है।

क्लाउडिकेशन का दर्द ज्यादातर पिंडिलियों, जांघों, कूल्हे और पैरों में महसूस होता है। वहीं समय के साथ यह दर्द गंभीर होता चला जाता है। इसके अलावा पैरों का ठंडा पड़ना भी इसके लक्षणों में से एक है।

गर्मी के मौसम में जब तापमान काफी ज्यादा हो, ऐसे समय में ठंड लगना एक संकेत है कि व्यक्ति पेरिफेरल आर्टरी डिजीज से जूझ रहा है। ऐसा भी हो सकता है कि यह स्थिति शुरुआत में परेशान न करे, लेकिन अगर लंबे समय तक यह स्थिती बनी रहती है तो इलाज में देरी न करें और समय रहते डॉक्टर से इसकी जांच करवाएं।

हाई कोलेस्ट्रॉल के अन्य लक्षणों में से एक पैरों की त्वचा के रंग और बनावट में बदलाव आना भी शामिल है। इस दौरान ब्लड वेसेल्स में प्लाक जमा होने लगते हैं, जिसके कारण ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है।

ऐसे में जब शरीर के कुछ हिस्सों में कम मात्रा में खून का दौड़ा होता है, तो वहां कि त्वचा की रंगत और बनावट के अलावा शरीर के उस हिस्से का फंक्शन भी प्रभावित होता है।

इसलिए, अगर आपको अपने पैरों की त्वचा के रंग और बनावट में बिना कारण कोई बदलाव नजर आए, तो हाई कोलेस्ट्रॉल इसका कारण हो सकता है।

डिस्क्लेमर: उक्त लेख सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।

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