आध्यात्म
उत्पन्ना एकादशी पर बना यह खास योग, इन उपायों से होगा भाग्योदय; मिलेगा धन
नई दिल्ली। हिंदी महीने मार्गशीर्ष के कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष यह एकादशी 8 दिसंबर, शुक्रवार को है। भगवान विष्णु के चार मास की निद्रा से जागने के बाद यह पहली एकादशी है। उत्पन्ना एकादशी इस बार शुक्रवार के शुभ संयोग में पड़ रही है।
एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है और शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी के लिए निर्धारित है। इस तरह एकादशी के साथ शुक्रवार का संयोग धन लाभ के योग निर्मित कर रहा है। इस दिन धन वृद्धि के कुछ विशेष उपाय करने से आपके धन में वद्धि होगी और मां लक्ष्मी आपसे प्रसन्न होंगी। आइए देखते हैं क्या हैं ये खास उपाय।
उत्पन्ना एकादशी पर ऐसे करें अभिषेक
उत्पन्ना एकादशी पर भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करें और तुलसी का पत्ता डालकर दूध और केसर से बनी खीर का भोग लगाएं। ऐसा करने से आपके धन के रास्ते में आ रही रुकावटें दूर होंगी और आपकी कमाई में वृद्धि होगी। आपके अंदर कार्यकुशलता बढ़ेगी और ऑफिस में आपको सराहना मिलेगी।
उत्पन्ना एकादशी पर तुलसी का उपाय
उत्पन्ना एकादशी पर सुबह और शाम के वक्त तुलसी के पेड़ पर घी का दीपक जलाएं और लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें। इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी के 11 पत्तों का भोग लगाएं और साथ ही ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। ऐसा करने से आपकी दरिद्रता दूर होती है और भगवान विष्णु के साथ ही मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
उत्पन्ना एकादशी पर 9 मुखी दीपक जलाएं
उत्पन्ना एकादशी पर भगवान विष्णु के सम्मुख 9 मुखी घी का दीपक जलाएं। ऐसा करने से आपके करियर में आ रही सभी समस्याएं दूर होती हैं और आपको मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलने से हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। दीपक में रुई के स्थान पर कलावे की बाती का प्रयोग करें तो यह उपाय और भी ज्यादा असरदार होता है।
उत्पन्ना एकादशी पर दक्षिणावर्ती शंख का उपाय
उत्पन्ना एकादशी पर घर के पूजा स्थान में दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना करने से आपके घर सुख समृद्धि और धन वैभव बढ़ता है। आपके घर में मां लक्ष्मी का वास होता है और उनकी कृपा आपके पूरे परिवार पर बनी रहती है।
इस दिन दक्षिणावर्ती शंख को पीतल के पात्र में रखकर दूध से अभिषेक करें और फिर इसे स्वच्छ जल से साफ करके घर के मंदिर में उत्तर दिशा में रखें। मां लक्ष्मी आपके घर की तरफ आकर्षित होंगी।
उत्पन्ना एकादशी पर करें इन वस्तुओं का दान
उत्पन्ना एकादशी पर भगवान विष्णु का आशीर्वाद पाने के लिए जरूरतमंद लोगों को वस्त्र और कंबल दान करें और साथ ही उन्हें की चीजें जैसे फल, गुड़, मूंगफली और चिक्की का दान करें। ऐसा करने से आपको विशेष पुण्य की प्राप्ति होगी और श्रीहरि का आशीर्वाद भी प्राप्त होगा।
डिस्क्लेमर: उपरोक्त जानकारी के पूर्ण सत्य होने का हमारा दावा नही है। अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
आध्यात्म
महाकुम्भ 2025: बड़े हनुमान मंदिर में षोडशोपचार पूजा का है विशेष महत्व, पूरी होती है हर कामना
महाकुम्भनगर| प्रयागराज में संगम तट पर स्थित बड़े हनुमान मंदिर का कॉरिडोर बनकर तैयार हो गया है। यहां आने वाले करोड़ों श्रद्धालु यहां विभिन्न पूजा विधियों के माध्यम से हनुमान जी की अराधना करते हैं। इसी क्रम में यहां षोडशोपचार पूजा का भी विशेष महत्व है। षोडशोपचार पूजा करने वालों की हर कामना पूरी होती है, जबकि उनके सभी संकट भी टल जाते हैं। मंदिर के महंत और श्रीमठ बाघंबरी पीठाधीश्वर बलवीर गिरी जी महाराज ने इस पूजा विधि के विषय में संक्षेप में जानकारी दी और यह भी खुलासा किया कि हाल ही में प्रयागराज दौरे पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी मंदिर में षोडशोपचार विधि से पूजा कराई गई। उन्हें हनुमान जी के गले में पड़ा विशिष्ट गौरीशंकर रुद्राक्ष भी भेंट किया गया। उन्होंने भव्य और दिव्य महाकुम्भ के आयोजन के लिए पीएम मोदी और सीएम योगी का आभार भी जताया।
16 पदार्थों से ईष्ट की कराई गई पूजा
लेटे हनुमान मंदिर के महंत एवं श्रीमठ बाघंबरी पीठाधीश्वर बलवीर गिरी जी महाराज ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक यजमान की तरह महाकुम्भ से पहले विशेष पूजन किया। प्रधानमंत्री का समय बहुत महत्वपूर्ण था, लेकिन कम समय में भी उनको षोडशोपचार की पूजा कराई गई। पीएम ने हनुमान जी को कुमकुम, रोली, चावल, अक्षत और सिंदूर अर्पित किया। यह बेहद विशिष्ट पूजा होती है, जिसमें 16 पदार्थों से ईष्ट की आराधना की। इस पूजा का विशेष महत्व है। इससे संकल्प सिद्धि होती है, पुण्य वृद्धि होती है, मंगलकामनाओं की पूर्ति होती और सुख, संपदा, वैभव मिलता है। हनुमान जी संकट मोचक कहे जाते हैं तो इस विधि से हनुमान जी का पूजन करना समस्त संकटों का हरण होता है। उन्होंने बताया कि पीएम को पूजा संपन्न होने के बाद बड़े हनुमान के गले का विशिष्ट रुद्राक्ष गौरीशंकर भी पहनाया गया। यह विशिष्ट रुद्राक्ष शिव और पार्वती का स्वरूप है, जो हनुमान जी के गले में सुशोभित होता है।
सभी को प्रेरित करने वाला है पीएम का आचरण
उन्होंने बताया कि पूजा के दौरान प्रधानमंत्री के चेहरे पर संतों का ओज नजर आ रहा था। सबसे महत्वपूर्ण बात ये कि उनमें संतों के लिए विनय का भाव था। आमतौर पर लोग पूजा करने के बाद साधु संतों को धन्यवाद नहीं बोलते, लेकिन पीएम ने पूजा संपन्न होने के बाद पूरे विनय के साथ धन्यवाद कहा जो सभी को प्रेरित करने वाला है। उन्होंने बताया कि पीएम ने नवनिर्मित कॉरिडोर में श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर भी अपनी रुचि दिखाई और मंदिर प्रशासन से श्रद्धालुओं के आने और जाने के विषय में जानकारी ली। वह एक अभिभावक के रूप में नजर आए, जिन्हें संपूर्ण राष्ट्र की चिंता है।
जो सीएम योगी ने प्रयागराज के लिए किया, वो किसी ने नहीं किया
बलवीर गिरी महाराज ने सीएम योगी की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रयागराज और संगम के विषय में जितना सोचा, आज से पहले किसी ने नहीं सोचा। संत जीवन में बहुत से लोगों को बड़े-बड़े पदों पर पहुंचते देखा, लेकिन मुख्यमंत्री जी जैसा व्यक्तित्व कभी नहीं देखने को मिला। वो जब भी प्रयागराज आते हैं, मंदिर अवश्य आते हैं और यहां भी वह हमेशा यजमान की भूमिका में रहते हैं। हमारे लिए वह बड़े भ्राता की तरह है। हालांकि, उनकी भाव भंगिमाएं सिर्फ मंदिर या मठ के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए हैं। वो हमेशा यही पूछते हैं कि प्रयागराज कैसा चल रहा है। किसी मुख्यमंत्री में इस तरह के विचार होना किसी भी प्रांत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
स्वच्छता का भी दिया संदेश
उन्होंने महाकुम्भ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि महाकुम्भ को स्वच्छ महाकुम्भ बनाने का जिम्मा सिर्फ सरकार और प्रशासन का नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं का भी है। मेरी सभी तीर्थयात्रियों से एक ही अपील है कि महाकुम्भ के दौरान स्नान के बाद अपने कपड़े, पुष्प और पन्नियां नदियों में और न ही तीर्थस्थल में अर्पण न करें। प्रयाग और गंगा का नाम लेने से ही पाप कट जाते हैं। माघ मास में यहां एक कदम चलने से अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है। यहां करोड़ों तीर्थ समाहित हैं। इसकी पवित्रता के लिए अधिक से अधिक प्रयास करें। तीर्थ का सम्मान करेंगे तो तीर्थ भी आपको सम्मान प्रदान करेंगे। स्नान के समय प्रयाग की धरा करोड़ों लोगों को मुक्ति प्रदान करती है। यहां ज्ञानी को भी और अज्ञानी को भी एक बराबर फल मिलता है।
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