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नेशनल

मकर संक्रांति तक यूपी में शुरू होगा कोरोना वैक्सीनेशन: सीएम योगी

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लखनऊ। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने यूपी में मकर संक्राति तक वैक्सिनेशन शुरू होने की उम्मीद जताई है। गोरखपुर में एक कार्यक्रम के दौरान योगी आदित्यनाथ ने 14 जनवरी से वैक्सिनेशन का काम शुरू होने की बात कही है। यूपी में आज वैक्सीन का ट्रायल शुरू हुआ है. वहीं 5 जनवरी तक राज्य के सभी जिलों में वैक्सीन का ट्रायल शुरू किया जाएगा।

सीएम योगी ने कहा, कोरोना जैसी महामारी से पूरा देश जूझ रहा है। अमेरिका और ब्रिटेन की स्थिति आज काफी खराब है। हमने पीएम मोदी के मार्गदर्शन में कोरोना के खिलाफ मार्च 2020 में कदम उठाना शुरू किया था। आज प्रदेश में ड्राई रन हो रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि दो महीने पहले यूपी में 68 हजार कोरोना के केस थे लेकिन अब केवल 13 हजार केस हैं। कोरोना जैसी महामारी में उत्तर प्रदेश, देश का पहला प्रदेश है जहां रिकवरी रेट 70 % है. इस दौरान उन्होंने कहा,”वो विश्वास के साथ कह सकते हैं कि मकर संक्रांति तक प्रदेश की जनता को वैक्सीन मिल सकेगी।जिससे कोरोना जैसी महामारी पर भी रोक लगाई जा सकेगी।

उत्तराखंड

यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने वाला पहला राज्य बना उत्तराखंड, इस मौके पर क्या बोले सीएम धामी

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देहरादून: उत्तराखंड से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आई है। यहां यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हो गया है। इसी के साथ उत्तराखंड UCC लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। UCC के लागू होने से विशेष तौर पर सभी धर्मों की महिलाओं को एक समान अधिकार मिलेंगे।

UCC पोर्टल और नियम लॉन्च के मौके पर क्या बोले सीएम?

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने UCC पोर्टल और नियम लॉन्च पर कहा, ‘आज उत्तराखंड में UCC लागू करके हम संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। आज इसी क्षण से उत्तराखंड में UCC पूर्ण रूप से लागू हो गया है। आज से सभी धर्म की महिलाओं को समान अधिकार प्राप्त होंगे। इस अवसर पर मैं समस्त उत्तराखंड वासियों की ओर से प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का धन्यवाद करता हूं क्योंकि उन्हीं के मार्गदर्शन में आज हम यह कानून राज्य में लागू करने में सफल हुए हैं।

उत्तराखंड में UCC लागू होने से क्या-क्या बदल जाएगा?

यूसीसी लागू होने के बाद शादी का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य हो जाएगा।

किसी भी धर्म, जाति या संप्रदाय के लिए तलाक का एक समान कानून होगा।

हर धर्म और जाति की लड़कियों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल होगी।

सभी धर्मों में बच्चा गोद लेने का अधिकार मिलेगा, दूसरे धर्म का बच्चा गोद नहीं ले सकते।

उत्तराखंड में हलाला और इद्दत जैसी प्रथा बंद हो जाएगी।

एक पति और पत्नी के जीवित होने पर दूसरा विवाह करना पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा।

जायदाद में लड़के और लड़कियों की बराबरी की हिस्सेदारी होगी।

लिव-इन रिलेशनशिप के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है।

लिव-इन रिलेशनशिप वालों की उम्र 18 और 21 साल से कम है तो माता-पिता की सहमति लेनी होगी।

लिव इन से पैदा होने वाले बच्चे को शादी शुदा जोड़े के बच्चे की तरह अधिकार मिलेगा।

यूनिफॉर्म सिविल कोड से शेड्यूल ट्राइब को बाहर रखा गया है।

 

 

 

 

 

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